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रंगों का मनुष्य के मन पर प्रभाव (Color Importance)

 रंगों का मनुष्य के मन पर प्रभाव (Color Importance)

रंगों का मन पर प्रभाव Color Importance Effect

रंगों का मन पर प्रभाव Color Importance Effect

रंगों का अपना चमत्कार होता है. उसका शरीर मन और भावना के स्तर पर बहुत प्रभाव होता है. जैसा कि हम सब जानते है कि जीवन पर सूर्य की किरणों का गहरा असर होता है, वैसे ही रंगों का भी असर होता है. वह भी तो प्रकाश ही है. आप स्वयं अनुभव करेंगे. कि जिस दिन आकाश बादलों से घिरा रहता है.

तब अग्नि मंद हो जाती है, शरीर सुस्ताने लग जाता है. धुप होती है, तो आदमी में स्फूर्ति होती है, सूरज के ताप का और प्रकाश का हमारे सरीर पर प्रभाव होता है, वैसे ही रंगों का प्रभाव भी हमारे शरीर और मन पर होता है.

वर्तमान में रंगों (Color Importance) पर बड़ा महत्वपूर्ण काम हुआ है, अनेक प्रयोग और तथ्य सामने आये है. एक प्रयोग किया गया. एक कमरे में बेंगनी रंग की पुताई की गई. उसमे मजदूरो को भर उठाने के लिए कहा गया. वे साठ किलो भर उठाते उठाते थक कर चूर हो गए.

फिर उन्हें लाल रंग के पुते कमरे में बार उठाने के लिए कहाँ गया. वहाँ कुछ विश्राम कर उन मजदूरो ने ७० से ७५ किलो वजन आसानी से उठा लिया. लाल रंग सक्रियता पैदा करता है. और स्नायुओ को स्फूर्ति देता है. इसलिए यह परिवर्तन आया.

रूस में एक प्रयोग किया गया. वहाँ देखा गया की एक विद्यालय के छात्र बहुत उदंड और पड़ने में आलसी है. अधिकारियो ने सारी दीवारे गुलाबी रंग से पुतवा दी. कुछ दिन बीते. विद्यार्थी की उदंडता कम हो गयी और उनकी दक्षता बढ़ गई. वे पढने में रूचि लेने लगे. यह प्रयोग बहुत सफल रहा.

आजकल इसलिए पढने लिखने वाली जगहों पर गुलाबी रंग मिलता है. ताकि सभी का पड़ने में मन लगे. पीला रंग ज्ञान तंतुओ को ठीक करता है. यह आचार्य का रंग है. आचार्य ज्ञान के प्रतीक होते है. ज्ञान की परम्परा के वे सम्वाहक होते है. आचार्य का सम्बन्ध पीले रंग से है.

इसलिए साधू संत पीले रंग के कपडे पहनते है. इससे ज्ञान में वृद्धि होती है. जिसके ज्ञान तंतु और मस्तिष्क कमजोर है, वे पीले रंग का प्रयोग कर लाभ उठा सकते है. क्रोध, अहंकार, हिंसा और झूट का अपना अपना रंग होता है. जब आदमी झूट बोलता है, तो ध्यान से देखने पर पता लग जाता है.

कि उसके चेहरे का रंग काला पड़ गया है. सत्यनिष्ठ व्यक्ति के चहरे में आभा आ जाएगी. हमारे व्यक्तित्व विचारो और मनोभावों के साथ रंगों का गहरा सम्बन्ध है. हम किस रंग से पुते कमरे में रहते है.

किस प्रकार के रंग का भोजन करते है. इन सबका हमारे विचारों पर प्रभाव पड़ता है. न्यायालय में न्यायधीश काले नीले रंग का कोट पहनते है. वकील भी काले रंग का कोट पहनते है. इसका भी कारण है. सर्दी में लोग काले नीले रंग के कपड़े पहनते है.

काला कम्बल ओढ़ते है. गर्मी में सफेद कपड़े पहनते है. इन सबका कारण है. काले रंग में प्रतिरोधात्मक शक्ति होती है. वह बाहर की वस्तु को आत्मसात नहीं करता. बाहर ही रोक देता है. सफ़ेद रंग में पारदर्शिता की शक्ति होती है.

नीले रंग के प्रयोग से शांति का अनुभव होता है. हरे रंग में रोग मिटाने कई अपूर्ण क्षमता होती है. वह विष के प्रभाव को मिटाने में शक्तिशाली साधन है. हरा रंग ठंडा होता है. नीले रंग का ध्यान करने से शांति मिलती है. जिन लोगों को गुस्सा ज्यादा आता है. उन्हें हरे नग या रत्न की अंगूठियाँ पहनानी चाहिए.

आजकल रत्न चिकित्सा का प्रचलन बहुत बड गया है. जो जो रंग ग्रहों के है, वे रंग इन रत्नों में बहुत गहरा सम्बन्ध है. इसलिए ज्योतिषी अमुक-अमुक रंगों के रत्नों की अंगूठियाँ पहनने का निर्देश देते है. इससे ग्रहों का प्रभाव कम होता है.

 

रंग का महत्व (Color Importance)

शांति व पवित्रता के लिए श्वेत रंग प्रभावशाली होता है.

सक्रियता और स्फूर्ति के लिए लाल रंग प्रभावशील होता है. यह रंग शक्ति व स्फूर्ति का संचार करता है.

पीला रंग भावना शुध्दि का प्रतीक है.

हरा रंग ठंडा व नेत्र ज्योतिवर्धक होता है.

नीला रंग अध्यात्म विकास का प्रेरक है.

इस प्रकार रंगों का हमारे जीवन मन, भावना से गहरा सम्बन्ध है.

 

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